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भजन: नारायण जिनके परिपालक - (राग: जगला ताल-३)
नारायण जिनके परिपालक, तिनको कौन दुःखाय सके रे ॥टेक॥
नारायण जिनके परिपालक, तिनको कौन दुःखाय सके रे ॥
* प्रहलाद भक्त को डारा अगन में, रोम न एक जलाय सके रे ॥१॥
नारायण जिनके परिपालक, तिनको कौन दुःखाय सके रे ॥
* गज को पकड़ ग्राह ने खेंचा,नहीं जल बीच डुबाय सके रे ॥२॥
नारायण जिनके परिपालक, तिनको कौन दुःखाय सके रे ॥
* द्रुपसुता की बीच सभा के, रंचन लाज उठाय सके रे ॥३॥
नारायण जिनके परिपालक, तिनको कौन दुःखाय सके रे ॥
*कंचन*जो हरि गुण गावे, सो निमेष पद पाय सके रे ॥४॥
नारायण जिनके परिपालक, तिनको कौन दुःखाय सके रे ॥-----[३]
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॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥
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Lable:॥ श्री हरि भजन ॥
This Bhajan "नारायण जिनके परिपालक" Is Posted ByRajkumar Deshmukh (ADMiN)On 16-07-2017, SunDay. @ Morning 10:00 AM (IST)
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This Shree Hari Bhajan Is Also Available OnSHREE BRAHMAANAND BHAJANMALABook In Page No. 18 @ Lesson No. 03.
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